मानसी

कुछ दिल से...

Tuesday, April 08, 2008

ग़ज़ल


दुआ में मेरी कुछ यूँ असर हो
तेरे
सिरहाने हर इक सहर हो

जहां के नाना झमेले सर हैं
कहाँ किसी की मुझे ख़बर हो

यहाँ तो कुछ भी नहीं है बदला
वहाँ ही शायद नई ख़बर हो

मिले अचानक वो ख़्वाब मे कल
कहीं दुबारा न फिर कहर हो

दिलों दिलों में भटक रहे हैं
कहीं तो अब ज़िंदगी बसर हो

न याद कोई जुड़ी हो तुम से
कहीं तो ऐसा कोई शहर हो

चलो चलें फिर
से लौट जायें
शुरु से फिर ये शुरु सफ़र हो


--मानोशी

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1 Comments:

  • At 7:55 PM, Blogger मीत said…

    क्या बात है. बहुत ख़ूब.

     

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