ब्रसल्स से हम पहुँचे आइंडहोवन। सारी दोपहर के सफ़र के बाद प्राय: शाम हो चुकी थी जब हम अपने होटल पहुँचे। बहुत सुंदर होटल, और सबसे अच्छी बात, खाना भारतीय। मेरा तो वैसे भी भारतीय खाने के बग़ैर गुज़ारा नहीं होता। भारत से खानसामा आये हुये थे हमारे लिये, जिन्होंने खाना बनाया था। शाकाहारी, माँसाहारी, सभी तरह के व्यंजन थे..वाह!
मनीष साहब ने हमें हमारे अगले दिन का कार्यक्रम बता दिया था। सुबह ६ बजे उठो, ७ बजे ना
हमें शहर का क्रूज़ करवा
हालैंड के लकड़ी के जूते बहुत प्रसिद्ध हैं। तो हम गये अब लकड़ी के जूतों की फ़
जूतों की फ़ैक्ट्री से हम गये दोपहर का खाना खाने, शहर के बीच खुले एक भारतीय रेस्तराँ में। यही बात सबसे अच्छी है एस.ओ.टी.सी. के टूर की...रोज़ भारतीय खाना...क्या कहने। खाना खा कर, हम पहुँचे वोलेन्डाम, जो कि अम्स्टर्डाम की एक मछुआरों की बस्ती है। यहाँ साफ़ दिखाई देता है कि क
मड्यूरोडाम है एक बौना शहर यानि कि इस शहर में पूरे अम्स्टर्डाम को
बौना कर के दिखाया गया है। विंडमिल, कथिड्रल, एयरपोर्ट आदि सभी बौनाकार। अपने आप में एक अनोखा देश। काफ़ी समय यहाँ बिता कर, हम वापस पहुँचे अपने उस रात के बसेरे में, थक कर चूर। पहुँचते पहुँचते शाम ढल चुकी थी। अम्स्टर्डाम की यादों को दिल में बसाये, अगले दिन एक नये पड़ाव की ओर निकलने की मानसिक तैयारी में लग गये हम, एक और सुबह के इंतज़ार में, कुछ नये याद संजोने, ब़ड़ी बेसब्री से...