प्रिय चलो हम बिछड़ जाते हैं
प्रिय चलो हम बिछड़ जाते हैं
बरसों बाद तुम्हारी आँखों के
कोरों में चुपचाप मिलूँगी
बिन चाहे उस अथाह सागर से
पानी बन झर झरना झरूँगी
बन लाली हर शाम रँगूंगी
रात को सपना बन के सजूँगी
प्रिय चलो हम बिछड़ जाते हैं।
सदियों बाद अपनी उंगली से
लिपटा कभी इक पल पाओगे
जिस पल तुम्हारी उंगली को
मैंने धीरे से चिमटा था
अपने हाथों में पढ़ लोगे
उन बंधन के स्मृति चिह्नों को
संग बाँध के उन स्मृतियों को
हाथ थाम कर साथ चलूँगी
प्रिय चलो हम बिछड़ जाते हैं।
बहुत दिनों के बाद कभी तुम
इसी रा्ह पर चलते होगे
पतझड़ होगा, तेज़ हवा में
सूखे पत्ते गिरते होंगे
मेरे नाम का भी कोई पत्ता
तुम्हारी बाँह में आ गिरेगा
मेरी खुश्बू को जान तो लोगे
मैं खुश्बू बन संग रहूँगी
प्रिय चलो हम बिछड़ जाते हैं।
कई सालों के बाद कभी तुम
आधे चांद को ढूँढते होगे
आधा चाँद पूरे होने की
रातें रातें गिनते होगे
और कोई तारा अचानक ही
आसमान से टूट गिरेगा
मेरे छोटे से सपनों के
आंगन में वो आ जुड़ेगा
मैं मुट्ठी में चांद और तारा
दोनों को संभाल रखूँगी
प्रिय चलो हम बिछड़ जाते हैं।