Saturday, September 04, 2010

मेरा मन मेरी बात नहीं सुनता है- अचला दीप्ति कुमार

अचला दीप्ति कुमार जिन्हें कविता विरासत में महादेवी जी से मिली है, की एक कविता प्रस्तुत है- (उन्हीं की आवाज़ में विडियो देखने के कविता के नीचे जायें)

हठी मन

मेरा मन मेरी बात नहीं सुनता है
जो गलियाँ पीछे छूट चुकीं,
जिनमें अपनी पहचान नहीं,
अपने उगने के बढ़ने के,
फलने के और पनपने के,
हैं बाक़ी जहाँ निशान नहीं,
यह उन गलियों में लौट लौट कर
अपना सिर क्यों धुनता है?
मेरा मन मेरी बात नहीं सुनता है।

जो चादर ओढ़ कुहासे की,
करवट ले मानो सोया है,
अपनी हर कोशिश, हर उद्यम
जिससे टकरा कर खोया है,
जिस पर अपना अधिकार नहीं,
जिसका निश्चित आकार नहीं,
उस अनदेखे कल को लेकर
यह क्या-क्या सपने बुनता है।
मेरा मन मेरी बात नहीं सुनता है।

बढ़ कर पैरों को छू फैली,
यह वर्तमान की जो रेती
है अपने साथ बहा लाई,
कितने दुलर्भ सीपी-मोती।
यह तो मन की अपनी निधि है
पर इसको भला कहाँ सुधि है?
कब झुक कर वह इस सिक्ता से
ये मुक्ता-माणिक चुनता है?
बस अनजाने कल को लेकर
जाने क्या सपने बुनता है,
या सूनी गलियों में जा-जा
अपना सिर क्यों धुनता है
मेरा मन मेरी बात नहीं सुनता है।

9 comments:

प्रवीण पाण्डेय said...

हटी भी है,मन मेरा। हठ भी करता है।

JHAROKHA said...

कब झुक कर वह इस सिक्ता से
ये मुक्ता-माणिक चुनता है?
बस अनजाने कल को लेकर
जाने क्या सपने बुनता है,
या सूनी गलियों में जा-जा
अपना सिर क्यों धुनता है
मेरा मन मेरी बात नहीं सुनता है।
सच कहा है आपने --मानोशी जी ---अचला जी,को कविता महादेवी जी से विरासत में मिली है। तभी तो इतनी खूबसूरत रचना हमें पढ़ने को मिल रही है। और हां,इतने दिनों तक आप कहां रहीं? पूनम

अनूप शुक्ल said...

सुन्दर कविता।
तुम भी अपनी कवितायें अपनी आवाज में डालो-खासकर अपने गीत।

Kamlesh Kumar Diwan said...

jo galiya piche choot gai....
bahut achchi kavita or kahi adhik sundar prastuti,
es kavita me achchla ji ne jo shabad chitra banaye hai be hamari yade hai jinhe bhulane ki koshish hum jivan bhar karte rahte hai .

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

चर्चा मंच के साप्ताहिक काव्य मंच पर आपकी रचना 7- 9 - 2010 मंगलवार को ली गयी है ...
कृपया अपनी प्रतिक्रिया दे कर अपने सुझावों से अवगत कराएँ ...शुक्रिया

http://charchamanch.blogspot.com/
कृपया चर्चा मंच पर कल ज़रूर आयें ...

सुमन'मीत' said...

मन तो बावरा है ....किसी की नहीं सुनता....................

अनामिका की सदायें ...... said...

sabse hathi to yahi hai...agar na maano iski baat to naa jane kitne aansu rulata hai.

sunder abhivyakti.

नूर की बूँद, “अनामिका” पर, ... देखिए

upendra said...

merqa maqn merqi bat nahion sunta....

bahoot hi achchha laga....

upendra ( www.srijanshikhar.blogspot.com )

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

http://charchamanch.blogspot.com/2010/09/270.html

yahan bhi dekhen