Tuesday, December 31, 2013

नव-वर्ष पर- वंदना

प्रभु गीत

सब के जीवन में कर दो प्रभु
खुशियों की बौछार,
सब का जीवन सुख से भर दो,
सुखमय हो संसार.

जीवन पथ पर कांटें हों पर,
साथ रहे फूलों का
कठिन राह में गर संग तुम हो,
फिर क्या भय शूलों का,

सुख-दुख सब कुछ प्रेम तुम्हारा,
जीवन इक उपहार.

सह न सकूँ यदि दर्द कभी तो,
संबल बन रहना तुम,
बह निकले गर आंसू,
करना मोती का गहना तुम,

अपने दुख में रो न पड़ूँ प्रभु,
करना ये उपकार.

मंदिर में मैं आया लेकिन
तुम से मिल ना पाया,
सूने मन में झांका जब तो
दिखी तुम्हारी छाया,

भजन बिना है पूजा मेरी,
करना तुम स्वीकार


मानोशी 

3 comments:

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
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आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा आज बुधवार (01-01-2014) को हों हर्षित तन-प्राण, वर्ष हो अच्छा-खासा : चर्चा मंच 1479 में "मयंक का कोना" पर भी है!
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सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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ईस्वी नववर्ष-2014 की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

vandana gupta said...

बेहतरीन प्रस्तुति …………रोंप खुशियों की कोंपलें
सदभावना की भरें उजास
शुभकामनाओं से कर आगाज़
नववर्ष 2014 में भरें मिठास

नववर्ष 2014 आपके और आपके परिवार के लिये मंगलमय हो ,सुखकारी हो , आल्हादकारी हो

Prasanna Badan Chaturvedi said...

बहुत बढ़िया सामयिक प्रस्तुति...आप को मेरी ओर से नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं...

नयी पोस्ट@एक प्यार भरा नग़मा:-तुमसे कोई गिला नहीं है