Monday, June 05, 2017

बंधन

बंधन बहुत मीठा होता है, अधिकार बहुत सुंदर| प्यार में दोनों साथ-साथ चलते हैं, रुक कर एक दूसरे को सहलाते हैं, हँसते हैं, खिलखिलाते हैं, गम में संग मुस्कराते है....और एक दिन जब प्यार बन जाता है नियंत्रण, अधिकार बदल जाता है स्वामीत्व में, कसते-कसते, बंधन बनने लगता है फंदा, तब खुशी बन जाती है  घुटन, हँसी एक दबी चीख, मु्स्कान बेड़ी, और जीवन...एक दंड...












1 comment:

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल गुरूवार (08-06-2017) को
"सच के साथ परेशानी है" (चर्चा अंक-2642)
पर भी होगी।
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सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक