Friday, December 02, 2005

सुख कहां है?--कुछ विचार

मन में आ रहे अनेक विचारों को व्यक्त करने के प्रयास में पता नहीं कितना मैं अर्थपूर्ण सही लिख पायी।

सुबह उठ कर खिडकी से बाहर का दृश्य मन में एक नयी स्फ़ूर्ति भर देता है। हरे पेड और झिलमिलाते पत्तों के बीच से झांकती सुनहरी किरण। ऐसी नैसर्गिक अद्भुत छवि मन के किसी कोने में जा कर हमेशा के लिये कैद हो जाती है। क्यों मन होता है खुश सुबह की लालिमा को महसूस कर और कहीं शाम की लालिमा देख उस सौन्दर्य में भी दुख के पुट का अभास सा होता है? उगने और डूबने में फ़र्क होता है मगर क्यों होती हैं दोनो ही दृश्यों में समानता? जीवन के हर मंच पर ऐसे विरोधाभास लिये हुये समान दृश्य क्यों प्रकट होते रहते हैं? क्या नहीं है मृत्यु भी कहीं जन्म के समान ही? दार्शनिक शेक्स्पीयर ने जीवन की व्याख्या करते हुये बुढ़ापे को शैशव के साथ जोड दिया है। इसी सुबह से शाम और जन्म से मृत्यु के बीच खेल खेले जाते हैं, चमत्कार गढ़े जाते हैं और लीलायें रची जाती हैं। आधे भरे तश्तरी को आधा खाली भी कहा जाता है और जिया जाता है जीवन सुख की खोज में। उस आधी खाली तश्तरी को भरने की कोशिश में सारा जीवन बीत जाता है। सुख का मोती ढूंढने की कोशिश में हर सीप को खोल कर देखते हैं हम। वो सीप हमें नहीं मिलता है। क्यों? कहां चूक जाते हैं हम? सच ज़्यादा गूढ नहीं, अगर ये समझ लें कि खुशी हम में ही बंद है, हमारा सच्चा साथी तो हमारा मन है, हम खुद हैं, तो खुशी हमारे पास ही होगी हमेशा। भगवान कहां सहायता करता है, वो तो हम ही होते हैं जो अपने को सहारा देते हैं और कठिन समय को पार करते हैं, हम खुद। दर्द मनुष्य को पवित्र करता है। नहीं मानती मैं। पवित्र नहीं शक्ति देता है। समझाता है कि अपने में डूब जाओ, ये सुख कहीं और नहीं तुम में है, ये दर्द , ये दुख सिर्फ़ तुम्हारी अंदर की शक्ति को बढाने के लिये है। हम क्यों करते हैं पूजा? क्यों बार बार भगवान से मांगते हैं अपनी मुराद? इन्सान अपनी इच्छाओं के वश मे जो होता है। इच्छायें रखना पाप नहीं, इच्छाओं को पूरा करना भी गलत नहीं, मनुष्य जाति में जन्म ले कर इच्छायें रखना तो स्वाभाविक है और सन्यासी भला कौन हुआ है? मगर इच्छाओं का पूरा न होना भी एक सत्य हो सकता है। तब घुटने तेक, गिड़गिडा़ना कितना ठीक है? कमज़ोर बन कर मांगने से अगर इच्छायें पूरी हो जाती हों तो कर्म का क्या? कर्म कर के भी फ़ल मिलेगा ये कोई ज़रूरी नहीं। मगर भाग कर छुपना, गिड़गिड़ाना, प्रार्थना में हल मांगना क्या कमज़ोरी नहीं? क्या करे कोई तब? जीये, खुल के जीये, कौन जानता है कि सच आत्मा मरती है या नहीं? शायद अमर हो मगर कहां इस ज़िन्दगी की बातें याद रखेगा कोई अगले जन्म तक। खुल के जीयें, इच्छायें पूरी न हों तो दुख भी जीयें। जीवन तो एक रेखाचित्र है। जब उतार आया है तो चढाव भी आयेगा और आज चढाव है तो कल उतार भी हो सकता है। तभी तो ये जीवन है। मगर क्यों अच्छे आदमी भी दुख सहते हैं और बुरे आदमी खुश रहते हैं? और अच्छा कौन है और बुरा कौन? क्या परिभाषा है अच्छे और बुरे की? आज इतना ही...बाद में कभी फिर...

6 comments:

Anonymous said...

Dhukh to Shasvat hai, aur vo shirf acche longo ko hi milata hai.Kyonki vahi sirf uski kimat janate hain.
Sukh Xanik hai. Sirf Bure Log uske picchhe Bhagate hai issi karan Log Bure banate hain.

अनूप शुक्ल said...

बड़ा गम्भीर लेख लिखा।
सुख का मोती ढूंढने की कोशिश में हर सीप को खोल कर देखते हैं हम।
जीवन तो एक रेखाचित्र है। जब उतार आया है तो चढाव भी आयेगा और आज चढाव है तो कल उतार भी हो सकता है।
बढ़िया लगा।कबीर दास कहते हैं:
सुखिया सब संसार है खावै अरु सोवै।
दुखिया दास कबीर है जागै अरु रोवै।।

Anonymous said...

Acchha jo dekhan main chala
Accha na mila koy
Jo man khoja apana
Muzasa acchha na hoy

Dhukh jo dekhan main Chala
Dhukhiya mila na koy
Jo man khoja apana
Muzasa Dhukhi na hoy

Anonymous said...

blog per comments ho
anup shukla na ho
ye namumkin
aap ne kya likha
wo bhool jayeye!!!
lekh per thoda
aur dhyan barsaye.
jo kahna saka

Manoshi Chatterjee मानोशी चटर्जी said...

अनाम ( anonymous)ji,

अपने नाम के साथ, कृपया बतायें कि आपके क्या विचार हैं। ये सुख की परिभाषा, या सुख कहां है, पूरी तौर से मेरे अपने च्यक्तिगत विचार हैं, किसी की सम्मति या टिप्पणी की अपेक्षा के बगैर। फिर भी आपके विचार जानने को ज़रूर उत्सुक रहूंगी। अगर हो सके तो देवनागरी में लिखें, रोमन में हिन्दी पढना बहुत मुश्किल लगता है।

Srijan Shilpi said...

मानसी जी, आपके शब्द-संसार से गुजरते हुए बहुत अच्छा लगा। जीवन के अनमोल मासूम क्षणों को अपनी संजीदगी से जीवंत बनाते हुए उन्हें अनजान सृजनधर्मी मित्रों के साथ संप्रेषित करने की आपकी खूबसूरत कला का कायल बनकर मैंने भी अपना एक निबंध अपने मित्रों के बीच प्रस्तुत किया है। आपके मूल्यवान टिप्पणियों की प्रतीक्षा रहेगी।