Saturday, October 18, 2008

दिल की नाज़ुक रग़ें टूटती हैं...

कुछ गाने ऐसे होते हैं जो मन को इस तरह भाते हैं कि जितनी भी बार सुनो, कभी पुराने नहीं लगते। कुछ ऐसा ही नाता है मेरा इस ग़ज़ल से। क़ैफ़ी आज़मी का लिखा एक एक लफ़्ज़ जैसे दिल को छूता है और लता की गायकी का कमाल और आवाज़ का दर्द इस ग़ज़ल के साथ पूरा इंसाफ़ करता है। मशहूर, नायाब ग़ज़ल-

आज सोचा तो आँसू भर आये
मुद्दतें हो गई मुस्कराये

3 comments:

manvinder bhimber said...

dil ki najuk rgen tutati hai...yaad itna bhi koi n aae...
aaj socha to aansu bhar aae...mudhate ho gae.....
bahtreen ...manoshi ji

रौशन said...

मुद्दतों हो गए मुस्कुराये
ये इस गाने की बेहतरीन लाइन है
शुक्रिया इस गाने के लिए

योगेन्द्र मौदगिल said...

SHANDAAR g a z a l
Wah..wa..