Wednesday, December 17, 2008

खो गई है ...

आज एक ग़ज़ल एक बहुत प्यारे दोस्त के लिये।




दूसरी गज़ल ढूँढ रही हूँ, मिल गई तो जल्द ही अपलोड करूँगी।

3 comments:

Udan Tashtari said...

आभार मेरे लिए इतनी बेहतरीन गज़ल पेश करने का. अगली मिले, तो जल्दी पोस्ट करो. :)

Manoshi said...

:) बेटे की शादी पर बधाई समीर। आप कब आ रहे हैं वापस, भाभी कैसी हैं? आपके नये पोस्ट पर करूँगी टिप्पणी जल्द।

गौतम राजरिशी said...

दोस्त के बहाने हमने भी इतनी अच्छी गज़ल सुन ली

शुक्रिया आपदोनों को