Friday, January 09, 2009

प्रिय तुम मेरे संग एक क्षण बाँट लो


प्रिय तुम मेरे संग एक क्षण बाँट लो

वो क्षण आधा मेरा होगा

और आधा तुम्हारी गठरी में

नटखट बन जो खेलेगा मुझ संग

तुम्हारे स्पर्श का गंध लिये


प्रिय तुम ऐसा एक स्वप्न हार लो

बता जाये बात तुम्हारे मन की

जो मेरे पास आकर चुपके से ।

जब तुम सोते होगे भोले बन

सपना खेलेगा मेरे नयनों में


प्रिय तुम वो रंग आज ला दो

जिसे तोड़ा था उस दिन तुमने

और मुझे दिखाये थे छल से

बादलों के झुरमुट के पीछे

छ: रंग झलकते इन्द्रधनुष के


प्रिय तुम वो बूंद रख लो सम्हाल कर

मेरे नयनों के भ्रम में जिस ने

बसाया था डेरा तुम्हारी आंखों में ।

उस खारे बूँद में ढूंढ लेना

कुछ चंचल सुंदर क्षण स्मृतियों के


प्रिय तुम...
.
चित्र साभार: गूगल

12 comments:

Reetesh Gupta said...

बहुत अच्छी लगी आपकी रचना...बधाई

Udan Tashtari said...

बढ़िया भाव!

महेंद्र मिश्रा said...

बढ़िया भावाव्यक्ति के साथ बढ़िया रचना .

Manoshi said...

शुक्रिया रीतेश, समीर, और महेंद्र। ये कविता मेरी एक बहुत पुरानी कविताओं में से है, जो काव्यालय पर प्रकाशित है। आज यहाँ ब्लाग पर पोस्ट कर दी।

रंजना said...

बहुत ही सुंदर भाव और अभिव्यक्ति मन को छू गई.....आभार.

गौतम राजरिशी said...

जी हम तो देर से आये हैं बधाई देने इस खूबसूरत रचना पर...
"प्रिय तुम ऐसा एक स्वप्न हार लो/बता जाये बात तुम्हारे मन की/जो मेरे पास आकर चुपके से/जब तुम सोते होगे भोले बन/सपना खेलेगा मेरे नयनों में...."
बहुत कोमल और मोहक शब्दों की गुंथी माला
और मैं जा रहा हूं काव्यालय पर आपकी अन्य रचनायें देखने

विनय said...

अति सुन्दर मनमोहक रचना!

---मेरा पृष्ठ
चाँद, बादल और शाम

JHAROKHA said...

Manashi ji
Bahut hee sundar sahaj shabdon men bhavnatmak abhivyakti.Badhai.
Poonam

creativekona said...

Manoshi ji,
Is bhav poorna kavita ke sath..kavita ke anuroop lagaya gaya chitra..bahut sundar post ke liye badhai.
Hemant Kumar

आशुतोष दुबे "सादिक" said...

aap ne bahut sundar gajal likha hai,aap aisi hi sundar gajal likhte rahe,aisi meri subhkamna hai,aap kabhi mere blog ke follower baniye,aap ka swagat hai.
http://meridrishtise.blogspot.com

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निवेदिता said...

bahut bariya hai