Sunday, April 18, 2010

याद पिया की आये

याद पिया की आये, ये दुख सहा न जाये...

सबसे पहले the authentic - बड़े गुलाम अली खां की आवाज़ में ...ये दर्द और कहाँ...



और एक नया तरीक़ा, रीमिक्स? मगर असरदार है- वडाली बंधु की आवाज़- निराला



फिर सुनिये उभरती हुईं- कौशिकी चक्रवर्ती की आवाज़- अब इतना बस चुके हैं बड़े गुलाम अली खां साहब जैसे लगती है बस उन्हीं की हो कर रह गई है ये ठुमरी, किसी और की आवाज़ में सुनना कुछ अजीब सा ही लगता है।

9 comments:

Shekhar kumawat said...

bahut khub


shekhar kumawat

http://kavyawani.blogspot.com/

M VERMA said...

बहुत सुन्दर
सुनकर मन प्रसन्न हो गया
अभार

वाणी गीत said...

अनमोल संग्रह ...आभार ...!!

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

सुबह-सुबह मधुर संगीत सुनकर मन प्रसन्न हो गया!

नीरज गोस्वामी said...

आज की सुबह इस स्वर गंगा के नाम हुई...बेहतरीन पोस्ट...आपका बहुत बहुत आभार...
नीरज

अल्पना वर्मा said...

wadali brothers ko sunNa hamesha hi bhaata hai...kaushiki ji ko sun nahin pa rahi hun...

UAE mein youtube aaj kal band hai.

vimal verma said...

खयाल अपना अपना और अंदाज़ भी अपना अपना...अच्छी पोस्ट के लिये आपका शुक्रिया।

MUFLIS said...

abhivaadan
aur
aabhaar

Yudhisthar raj said...

वाह उस्तादों ...