Thursday, August 06, 2015

जीवन बस अपना होता है

जीवन बस अपना होता है,
अपने ही सँग जीना सीखो॥

जब-जब आशा के पौधोँ को
सींचा मैँने बडे जतन से
फूल खिलेँगे, मोती देँगे,
सपना बोया बहुत लगन से,
माली ने निष्ठुरता से यूँ
अधखिलती कलियों को काटा
रँगहीन था रक्त बहा जो
लेकिन क्या परवाह किसी को॥

जीवन बस अपना होता है,
अपने ही सँग जीना सीखो॥

नई-पुरानी छोटी-छोटी
बूँदों से कुछ बादल जोडे,
कहीं सितारा, कहीं चँद्रमा,
झिलमिल रातें, सपने काढे,
सोचा छू लूँ, पँख लगा कर,
ऐसी आँधी चली अचानक
सावन बरसा पर तरसा कर
फिर से प्यासा रखा नदी को॥

जीवन बस अपना होता है,
अपने ही सँग जीना सीखो॥

हम हैं जो बुनते अनदेखे
सब आशंकाओं के जाले,
हम ही होते शत्रु स्वयं के
अपने से ही चलते चालें,
तेज़ धार में समझबूझ कर
दे देते पतवार नाव की,
गहरे जल के हिचकोलों में
दोषी ठहराते माझी को॥ 

जीवन बस अपना होता है,
अपने ही सँग जीना सीखो॥



6 comments:

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शनिवार (08-08-2015) को "ऊपर वाले ऊपर ही रहना नीचे नहीं आना" (चर्चा अंक-2061) पर भी होगी।
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सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

Kailash Sharma said...

बहुत सटीक और सारगर्भित अभिव्यक्ति..बहुत सुन्दर गीत

kamlesh kumar diwan said...

bahut sundar geet hai 'bade jatan se sapne paale

पूनम श्रीवास्तव said...

bahut bahut sundar bhavabhivyakti

संजय भास्‍कर said...

सुन्दर गीत

संजय भास्‍कर said...

सुन्दर गीत