काफी दिनों के बाद तुम्हारा ब्लॉग देखा। यह तो मालूम ही नहीं था कि अच्छी कविताएं लिखने के अतिरिक्त इतनी अच्छी फ़ोटोग्राफी भी करती हो। 'बर्फ़' और 'आसमान' के सारी ही तस्वीरें बहुत अच्छी हैं। 'उलझा आसमान' (बर्फ़ से ढकी सूखी टहनियों का जाल) बहुत ही आकर्षक है। बैकग्राउंड में जो आसमान है,विशेषकर रोशनी का भाग है, वहां नज़र ठहर जाती है। कविताएं बड़ी रुचि से पढ़ी! महावीर
6 comments:
चित्रांकित कविता....
बढिया है.....
आशीष
(not succeeding linking - reposting the comment)
अब समझा ! पापी आसमान सिर्फ खिलता ही नहीं, वह तो अकेला, जलता, लजाता, उलझा हमसफ़र भी होता है !
वाकई अच्छे चित्र हैं
वैसे मानसी आसमानी आसमान तुम्हें कैसा दिखता ?
काफी दिनों के बाद तुम्हारा ब्लॉग देखा। यह तो मालूम ही नहीं था कि अच्छी कविताएं लिखने के अतिरिक्त इतनी अच्छी फ़ोटोग्राफी भी करती हो।
'बर्फ़' और 'आसमान' के सारी ही तस्वीरें बहुत
अच्छी हैं। 'उलझा आसमान' (बर्फ़ से ढकी सूखी
टहनियों का जाल) बहुत ही आकर्षक है। बैकग्राउंड
में जो आसमान है,विशेषकर रोशनी का भाग है, वहां नज़र ठहर जाती है।
कविताएं बड़ी रुचि से पढ़ी!
महावीर
kaafi khubsurat pics hain. mujhe "jalta aasmaan" aur "uljha aasmaan" khaas taur par bahut pasand aaye.
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