Monday, December 12, 2005

आसमान

अकेला आसमान

उजला आसमान
जलता आसमान

लजाता आसमान

उलझा आसमान

हमसफ़र आसमान

6 comments:

आशीष श्रीवास्तव said...

चित्रांकित कविता....

बढिया है.....

आशीष

लाल्टू said...
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लाल्टू said...

(not succeeding linking - reposting the comment)
अब समझा ! पापी आसमान सिर्फ खिलता ही नहीं, वह तो अकेला, जलता, लजाता, उलझा हमसफ़र भी होता है !

masijeevi said...

वाकई अच्‍छे चित्र हैं

वैसे मानसी आसमानी आसमान तुम्‍हें कैसा दिखता ?

महावीर said...

काफी दिनों के बाद तुम्हारा ब्लॉग देखा। यह तो मालूम ही नहीं था कि अच्छी कविताएं लिखने के अतिरिक्त इतनी अच्छी फ़ोटोग्राफी भी करती हो।
'बर्फ़' और 'आसमान' के सारी ही तस्वीरें बहुत
अच्छी हैं। 'उलझा आसमान' (बर्फ़ से ढकी सूखी
टहनियों का जाल) बहुत ही आकर्षक है। बैकग्राउंड
में जो आसमान है,विशेषकर रोशनी का भाग है, वहां नज़र ठहर जाती है।
कविताएं बड़ी रुचि से पढ़ी!
महावीर

Geetali said...

kaafi khubsurat pics hain. mujhe "jalta aasmaan" aur "uljha aasmaan" khaas taur par bahut pasand aaye.