Sunday, November 16, 2008

मीना कुमारी की आवाज़ में- उनकी एक ग़ज़ल

पारुल के ब्लाग पर मीना कुमारी की नज़्म पढ़ी। उनकी आवाज़ में कुछ रिकार्डिंग्स हैं मेरे पास जो मुझे अनूप भार्गव से मिली हैं। अनूप दा का शुक्रिया ऐसे तोहफ़े के लिये।

मीनाकुमारी की एक ग़ज़ल मीना कुमारी की आवाज़ में ही-



पूरी ग़ज़ल-

टुकड़े-टुकड़े दिन बीता, धज्जी-धज्जी रात मिली
जिसका जितना आँचल था, उतनी ही सौग़ात मिली

रिमझिम-रिमझिम बूँदों में, ज़हर भी है और अमृत भी
आँखें हँस दीं दिल रोया, यह अच्छी बरसात मिली

जब चाहा दिल को समझें, हँसने की आवाज सुनी
जैसे कोई कहता हो, ले फिर तुझको मात मिली

मातें कैसी घातें क्या, जलते रहना आठ पहर
दिल-सा साथी जब पाया, बेचैनी भी साथ मिली

होंठों तक आते आते, जाने कितने रूप भरे
जलती-बुझती आँखों में, सादा सी जो बात मिली

3 comments:

abhivyakti said...

mere blog par aane ke liye dh
anyawad ,aap achcha gati hain.
-jaya

vimmi said...

hiiiiiiii......meena kumari ki awaz me bahut kuchh yaha net per maujood hai per jo parul ji ne kiya hai unki rachna ko apni awaz de ker ye kuchh alag aur naya sa laga...........ager aap bhi aisa hi kuchh kerti to shayed aur achha lagata........khair....

अनूप शुक्ल said...

बहुत अच्छा लगा मीना कुमारी की आवाज में इसे यहां सुनकर। उनकी आवाज का दर्द साफ़ सुनाई पढ़ता है। शुक्रिया इसे यहां सुनवाने का।