Monday, November 17, 2008

क्या आपका बच्चा पढ़ कर समझ लेता है?


आज की छुट्टी का सदुपयओग करने की कोशिश है ये पोस्ट।

चाहे अंग्रेज़ी हो या हिन्दी या कोई और भाषा, ज़रूरी है कि बच्चा जो भी पढ़ रहा हो, उसे समझे। कई बार बच्चे बहुत साफ़ और सुंदर, बिना रुके आपको पूरी क़िताब पढ़ कर सुना देंगे मगर, उस किताब से संबंधित प्रश्न पूछने पर वो जवाब नहीं दे पाते। इस के कई कारण हो सकते हैं। कुछ गंभीर, जैसे लर्निंग डिसबिलिटी, या कोई और संगीन कारण, और कई बार कुछ हमारी उच्चापेक्षा और सही दिशा न दिखा पाना।

आइये जानें और समझें कि किस तरह बच्चे की comprehension skills (पढ़ कर समझ पाने की क्षमता) को बढ़ाया जाये। कुछ रीडिंग स्ट्रैटेजी (पढ़ने की पद्धतियाँ) पर ध्यान दें।

बच्चे का रोज़ आधे से एक घंटा पढ़ना (चाहे कोई भी भाषा हो), चाहे वो कोई किताब हो, या अख़बार, ज़रूरी है। बहुत ज़रूरी। कभी कभी बच्चे अपनी समझ से ज़्यादा ऊँची किताब पसंद कर लेते हैं और उसे पढ़ने लगते हैं, फिर वो बोरिंग हो जाती है उनके लिये और वो उसे नहीं पढ़ते। बच्चा सही किताब कैसे चुने? इसका एक कारगर नियम है ५ उंगली सिद्धांत (five finger rule) जब बच्चा किताब पढ़ना शुरु करे तो पहले पृष्ठ पर अगर उसे ५ ऐसे शब्द मिलते हैं जो कि उसे समझ नहीं आते, तब वो किताब उसके लिये बहुत कठिन है, उसे उस किताब को नहीं पढ़ना चाहिये। ध्यान रहे कि बच्चे का मनोरंजन होना ज़रूरी है पढ़ते वक़्त। अगर उस किताब के पहले पृष्ठ पर सारे शब्द उसे आसानी से समझ आ गये तो वो किताब कुछ ज़्यादा ही आसान है उसके लिये। और १-२ शब्द कठिन हैं, तब वो किताब सही है उसके लिये। (मैं यहाँ अंग्रेज़ी में पढ़ने की बात कर रही हूँ पर सभी भाषा में यही नियम लागु होंगे। वैसे भी "language skills are transferable")


आइये अब कुछ रीडिंग स्ट्रैटेजीज़ के बारे में बात करें। कैसे समझें कि बच्चे ने पढ़ कर समझा या नहीं? या कैसे बेहतर समझा पायें उसे। इन का उपयोग टीचर स्कूल में और अभिभावक घर मॆं कर सकते हैं।

अगले कई अंकों में इन सब स्ट्रैटेजीज़ को विस्तार से समझाने की कोशिश होगी।




4 comments:

cmpershad said...

मनोविज्ञान की दृष्टि से अच्छी जानकारी है। जारी रखें।

vimmi said...

yeah ye aapne ek achhi jankari dene ka prayas kiya hai aur aap safal bhi hui hai.........bas aise hi apne ander maulikta laati rahe........

अनूप शुक्ल said...

अच्छा लग रहा यह पढ़ना। आगे भी इस तरह के लेख का इंतजार रहेगा।

www.creativekona.blogspot.com said...

Manoshi ji,
Apne bachchon ke mnovigyan par ek achha lekh likha ha.Lekh se saf pata chlta ha ki apkee children psycology par achchee pakad ha.in fact aj parrents ke liye aise artciles kafee upyogee honge.Asha karta hoon ap is series men age bhee aise lekh likhengee.Man bhee bachhon ke hit men apne blog par kuch likhta rahta hoon.man ap ko apne blog par bhee bachchon kee samasyaon par likhne ke liye amantrit kar raha hoon.Shoobhkamnaen.
Hemant Kumar