Saturday, March 19, 2011

सखि बसंत आया- होली पर


सखि बसंत आया ।

कोयल की कूक तान,
व्याकुल से हुए प्राण,
बैरन भई नींद आज,
साजन संग भाया ।
सखि बसंत आया ।

लगी प्रीत अंग-अंग,
टेसूओं के लाल रंग,
बिखरी महुआ सुगंध,
मदिरा मद छाया ।
सखि बसंत आया ।

पाँव थिरक देह हिलक,
सरसों की बाल किलक,
धवल धूप आज छिटक,
सोन जग नहाया ।
सखि बसंत आया ।

अमुवा की डार-डार,
पवन संग खेल हार,
उड़ गुलाल रंग मार,
सुखानंद लाया ।
सखि बसंत आया ।

7 comments:

abcd said...

व्याकुल से हुए प्राण..

bilaspur property market said...

पिचकारी की धार,
गुलाल की बौछार,
अपनों का प्यार,
यही है यारों होली का त्यौहार.
होली की ढेरों बधाई व शुभकामनायें ...जीवन में आपके सारे रंग चहकते ,महकते ,इठलाते ,बलखाते ,मुस्कुराते ,रिझाते व हसाते रहे

manish jaiswal
bilaspur
chhattisgarh

Patali-The-Village said...

होली पर्व की हार्दिक शुभकामनाएँ|

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

बहुत सुन्दर रचना!
आपको पूरे परिवार सहित होली की बहुत-बहुत शूभकामनाएँ!

प्रवीण पाण्डेय said...

होली आते आते ही बसंत के रंग को हम आत्मसात कर पाते हैं।

संजय भास्कर said...

रंगों का त्यौहार बहुत मुबारक हो आपको और आपके परिवार को|

सुमन'मीत' said...

RANG BIRANGI RACHNA.....BAHUT SUNDAR..