Sunday, September 28, 2008

आशा जी की गाई एक ग़ज़ल

आशा जी द्वारा ये गज़ल सुनिये। बेहतरीन अदायगी-



यूँ न थी मुझसे बेरुख़ी पहले
तुम तो ऐसे न थे कभी पहले

जिसमें शामिल तुम्हारी मर्ज़ी थी
हमने चाही वही खु़शी पहले

हमने तुमसे यही तो सीखा था
दुश्मनी बाद दोस्ती पहले

जब तलक वो न था तो ऐ 'राही'
कितनी आसां थी ज़िंदगी पहले


--सईद राही

3 comments:

Mrs. Asha Joglekar said...

बेहतरीन गज़ल और उम्दा गायकी ।

Parul said...

हमने तुमसे यही तो सीखा था
दुश्मनी बाद दोस्ती पहले..kya baat hai
जब तलक वो न था तो ऐ 'राही'
कितनी आसां थी ज़िंदगी पहले..waah manoshi jee khush ho gaya...:)

seema gupta said...

" sach mey bhut dilkash hai"

Regards