Tuesday, January 20, 2009

क्या आपका बच्चा पढ़ कर समझ लेता है? रीडिंग स्ट्रैटिजी-३


पिछली बार इस श्रॄंखला के भाग-१ और भाग २ में मैंने बच्चों को पढ़ना सिखाने या पढ़ कर बेहतर समझ पाने के कुछ उपायों का ज़िक्र किया था। आज एक ऐसा ही अन्य उपाय-
इसे हम Reading Response लिखना (पढ़ कर अपने विचार व्यक्त करना) कहते हैं। अर्थात, बच्चा कोई भी किताब पढ़ कर उसके बार में लिखे। मगर क्या लिखे? ज़रूरी है कि बच्चा जो लिखे वो एक ढाँचे में हो और वैज्ञानिक हो। बच्चा जो कुछ भी पढ़े (आज हम सिर्फ़ फ़िक्शन (काल्पनिक) किताबों की ही बात करते हैं), उसे लिखे, ये बहुत ज़रूरी है। इससे न सिर्फ़ उसकी चिंतन शक्ति विकसित होती है बल्कि लिखने का भी अभ्यास होता है।

मगर वो क्या लिखे-

ज़रूरी है कि वो 3R का इस्तेमाल करे अपना रीडिंग रेस्पांस लिखते वक़्त। 3R अर्थात- Retell, Relate, Reflect। यानि कि पहले तो बच्चे ने जो पढ़ा उसे अपने शब्दों में दोबारा लिखे (RETELL). फिर RELATE अर्थात अपने जीवन या किसी और किताब से उसे जोड़ने की कोशिश करे, और आख़िर में REFLECT अर्थात उस किताब के बारे में उसकी राय दे नाना तरहों से। इन तीनों को अब हम विस्तार से देखते हैं।

RETELL या अपने शब्दों में फिर से किताब की कहानी को दोहराना। इसे करने के लिये बच्चे को कहें कि वो कुछ बातें ज़रूर ही बताये-

१) चरित्र के नाम (name of the characters)

२) परिवेश (setting)

3) समस्या (problem)- हर कहानी में एक समस्या पैदा होती है, वो क्या है?

4)घटनायें (events)- कहानी के उस समस्या के समाधान के लिये और क्या घटनायें होती हैं?

5) समाधान (solution)- समस्या का समाधान।

RELATE- ये एक ज़रूरी प्रक्रिया है। वैज्ञानिक दृष्टि से माना जाता है कि इस तरह के प्रक्रिया से बच्चे की चिंतन/मंथन शक्ति विकसित होती है। RELATE तीन तरह के हो सकते हैं।

1) text to self

2)text to text

3)text to world/media

बच्चे को कहें कि जब वो RETELL पूरा कर ले तो जिस किताब के बारे में वो लिख रहा है उस किताब को अपनी ज़िंदगी के किसी घटना से जोड़ने की कोशिश करे या पढ़ते वक़्त उसे जो कुछ याद आया लिखे। और वो ये भी बताये कि किताब के कौन से हिस्से को पढ़ कर उसे ये याद आया। इसे ही RELATE कहेंगे। वो अपनी ज़िंदगी की किसी घटना से उस कहानी को जोड़े तो text to self हुआ, अगर किसी और पहले पढ़ी किताब की याद आती है उसे तो फिर text to text relation हुआ और अगर वो इस कहानी को किसी दुनिया में हुये घटना से जोड़ता है जो उसने संभवत: किसी फ़िल्म या टीवी पर देखी हो, तो text to media /world हुआ।

अब बारी आती है REFLECT की: अर्थात बच्चे से कहें कि आख़िर में वो ये लिखे कि उसे इस किताब में क्या सबसे पसंद आया, क्या नहीं आया और क्यों? इसके अलावा, इस किताब को पढ़ते वक़्त उसके ज़ेहन में क्या क्या प्रश्न आये। इस कहानी का अंत वो किस तरह करना चाहेगा और इस कहानी में क्या बदलना चाहेगा आदि।

अगर इतनी चीज़ें बच्चा किसी किताब को पढ़ने के बाद अच्छे से कर लेता है तो वो इस किताब को समझ गया है और इस तरह उसके पढ़ने और लिखने की क्षमता भी विकसित होती है। ये सारे स्ट्रैटिजी काफ़ी अनुसंधान के बाद विकसित किये गये हैं और आज़माये हुये हैं। आशा है कि इस लेख से आप भी अपने बच्चे को पढ़ पाने और उसे गहराई से समझ पाने में मदद कर पायेंगे।
अगले अंक में Literature Circle/Guided Reading पर कुछ बातें।

4 comments:

संगीता पुरी said...

बहुत अच्‍छी बातें बतायी आपने...अधिकांश बच्‍चे पढ तो लेते हैं...चिर्फ री‍डिंग..कुछ समझते नहीं और प्रश्‍नोत्‍तरों को रट लेते हैं...इससे उनका विकास नहीं हो पाता।

विनय said...

ज्ञानवर्धक बातें, बहुत ख़ूब


---आपका हार्दिक स्वागत है
चाँद, बादल और शाम

Udan Tashtari said...

अब समझा हो या न समझा हो-फिलहाल तो पढ़कर नौकरी में निकल लिया है. वैसे है ज्ञानवर्धक बात. :)

creativekona said...

Manasee ji,
Apkee reading strategies-3,ka kafee dinon se intajar tha.Kafee saral shabdon men apne vishya ko samajhaya hai.main educational reaserch ke technical shabdon ko bhee naheen janta fir bhee lekh pooree tarah samajh saka.
Vase ye lekh Bharat ke sath hee sabhee vikas sheel deshon ke abhibhavkon aur primary skool teachers ko bhee padhana chahiye.
Hemant Kumar