
आज अनूप शुक्ल जी के कहने पर गद्य लिखने का प्रयास है। ऐसा नहीं कि गद्य लिखा नहीं मगर बहुत वक्त लग जाता है गद्य लिखने में। अब अनूप जी ने ही कहा कि "मैं क्यों लिखती हूं" इस बात पर लिख डालो। सच, मैं क्यों लिखती हूं? जब ये लिखने की कोशिश की तो कुछ लिखते ही नहीं बना। तब अनुप जी की बात याद आई, जो तुम्हें अच्छा लगे वो लिखो। हां तो मुझे क्या अच्छा लगता है। पर अगर मैं वो लिखूं जो मुझे सचमुच बहुत अच्छा लगता है तो मुझे पता है मेरे पास कुछ पर्सनल ईमेल्स आयेंगे , पर ठीक है, हां यही विषय ठीक है, उसी पे कुछ लिख डालूं.....
ज्योतिष।
जी, मैं ने ज्योतिष पर अपने अब तक के जीवन का काफ़ी समय खर्च किया है। ज्योतिष का शौक हुआ मुझे जब मैं मास्टर्स कर रही थी। मास्टर्स तो रसायन शास्त्र में कर रही थी मगर किताबें ज्योतिष की पढती थी, मम्मी से छुपा कर ( उस उम्र में भी, अब शर्म आती है, अपने गैर ज़िम्मेदार होने पर)। खैर, हमारे घर के ऊपर ( क्वाटर्स में रहते थे हम) एक अंकल रहते थे, उन्होने ही मुझे ज्योतिष के बेसिक्स सिखाये। मगर बेसिक्स सीखने से कुछ भी नहीं होता, ये मुझे आज मालूम है, क्योंकि किसी कुंडली को देखने के लिये, उसे सही पढने के लिये बेसिक्स के अलावा बहुत कुछ जानना ज़रूरी होता है, और फिर जानने से भी कुछ नहीं होता, अनुभव से, बहुत सारी जन्म कुंड्लियाँ देख कर अपने निर्णय लेने की क्षमता पर धीरे धीरे भरोसा होने लगता है। ज्योतिष द्वारा की गयी कई भविष्यवाणियाँ जब सही होने लगीं तो साइंस की छात्रा होने की वजह से जो मन की दुविधा थी, वो कहीं मार खाने लगी और इस विद्या पर यकीं होने लगा। ये बात समझ में आई कि ज्योतिष गलत नहीं ज्योतिषी गलत होते हैं। काफ़ी किताबें पढीं ज्योतिष पर, मगर सबसे अच्छा माध्यम रहा...इन्टर्नेट। बहुत सारे ज्योतिषियों से मुलकात हुई और बहुत सारी जन्म कुंडलियों को देखने का मौका मिला और उनसे सीखने का। ये तो जीवन भर सीखने वाली विद्या है, तो मेरी पढाई तो कभी पूरी नहीं हो सकती मगर इससे ज़्यादा दिलचस्प कोई और पढाई नहीं।
आइए ज्योतिष के कुछ आधारभूत बातों को जानें। फिर हो सकता है इसे पढ कर सचमुच कोई ज्योतिष की तरफ़ इतना आकर्षित हो जाये कि मेरा पर्सनल ईमेल पहुँचे उस तक....
शुरुआत करते हैं ग्रहों से। कुल मिला कर ज्योतिष में ( जो हमारे जीवन को प्रभावित कर सकते हैं) ९ ग्रह माने गये हैं। इन में से दो को छाया ग्रह कहा गया है- राहु और केतु।
सूर्य, चन्द्रमा ( हां ये ग्रह नहीं पर ज्योतिष में उन्हें ऐसे ही सम्बोधित किया जाता है), मंगल, बुध, बृहस्पति, शुक्र, और शनि के साथ राहु और केतु।
रवि या सूर्य को क्रूर ग्रह माना गया है, शनि, मंगल को पापग्रह और बृहस्पति, चन्द्रमा और बुध को शुभ। यानि कि ये ग्रह अपनी अपनी योग्यता अनुसार फल देते हैं ( ध्यान रहे, ऐसा भी ज़रूरी ही नहीं कि पापग्रह हमेशा बुरा ही करें, क्यों कि अभी तो ये सिर्फ़ बेसिक्स हैं)।
जन्मकुंडली बनाने के लिये सही जन्म दिन, जन्म समय और जन्म्स्थान (longitudr/lattitude) ज़रूरी होते हैं। आज कल कुछ अच्छे साफ़्ट्वेयर हैं जो बिल्कुल सही जन्म कुंडली बना देते हैं जैसे होरा लाईट, कृष्ना, आदि।
जन्म कुंडली में १२ घर होते हैं और हर एक घर का अपना महत्व होता है।
घर १ जिसे लग्न कहते हैं (ऊपर चित्र में नीले रंग से AS यानि कि Ascendent) उस व्यक्ति विशेष की शारीरिक अवस्था, रंग रूप, कद काठी, चिन्तन प्रक्रिया इत्यादि को बताता है
घर २ ( बाईं तरफ़ जहां ९ लिखा है वो दूसरा घर है, अब ९ क्यों लिखा है ये बाद में) धन, परिवार, शादी का कारक, इत्यादि होता है
घर ३ ( जहां १० लिखा है) पराक्रम, भाई, इत्यादि...
घर ४ ( जहां ११ लिखा है) माता, मकान, पढाई लिखाई, सुख इत्यादि को दिखाता है। इसी तरह सारे घर जीवन के विभिन्न पहलुओं को दिखाते हैं। अब कुंडली बनाने पर पता चलता है कि इन घरों में कोई न कोई ग्रह आ कर बैठता है। ( ऊपर देखें) यानि कि अगर आपको दिखे कि सातवें घर में चंद्रमा बैठा है तो आप अनुमान कर सकते हैं कि शायद ( और बहुत चीज़ें देखनी होती हैं पर फिर भी साधरणत:) बीवी या शौहर खूबसूरत हो, घरेलु हो क्योंकि सातवां घर पति या पत्नी स्थान माना जाता है। इस चित्र में सातवें स्थान पर ( बाईं तरफ़ से घर गिन कर देखें) सूर्य बैठा है तो शायद पति या पत्नी काफ़ी तेजस्वी हो, अधिकारी हो। कुछ घर खाली भी रह जाते हैं, वहां कोई ग्रह नहीं होता, मगर ये नहीं कि जीवन का वो पहलू खाली ही रह गया यानि कि अगर सातवें स्थान पर कोई ग्रह नहीं तो शादी ही न हो उस आदमी की...ऐसा नहीं होता... याद रखें, अभी भी हम बेसिक्स में हैं।
अनूप, रवि, जीतू और भी सभी...आप इतने बडे बडे लेख कैसे लिख लेते हैं...हम तो थक गये लिखते लिखते...
आगे और बेसिक्स बाद में...