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Tuesday, April 16, 2013
हाइकु- वर्तमान
छीनाझपटी
लड़का और कुत्ता
एक ही रोटी
खुला आसमां
कड़कडाती सर्दी
फटा कंबल
तेज़ ज़िंदगी
सुंदर सजा घर
दो अजनबी
झुकी गर्दन
पढ़ी-लिखी लड़की
शादी की बात
रोती लड़की
निश्चेष्ट मां की देह
टूटी बोतल
जल्द कदम
जंगल या शहर?
घिरती शाम
--मानोशी
Thursday, March 05, 2009
फागुनी चाँद- कुछ हाइकु
Tuesday, February 03, 2009
फागुनी हाइकु
धूप थिरके
वासंती चूनरिया
फागुन आया
वासंती चूनरिया
फागुन आया
बिछा पलाश
चहुँ ओर फागुन
रंग गोधूली
चहुँ ओर फागुन
रंग गोधूली
झूमे सरसों
किलक रही हवा
धरा लजाती
कोयल कूके
हरेक दिशा जागी
निठुर पिया
बरसा प्रेम
होरी रंग निराला
भेद मिटाये
पी संग खेले
गोरी जी भर होरी
लाज भुलाये
गोरी जी भर होरी
लाज भुलाये
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(रचना: २००५ प्रकाशित)
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